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हिन्दू परंपरा अनुसार मृत्यु के पश्चात की समस्त विधियाँ (तेरहवीं तक)

 1. प्राण त्यागते ही की जाने वाली प्राथमिक क्रियाएं जैसे ही व्यक्ति प्राण त्यागता है, उसके दक्षिण पैर को पहले भूमि पर रखकर शरीर को जमीन पर लिटाया जाता है। शरीर के पास धूपबत्ती/अगरबत्ती जलाई जाती है। गंगा जल और तुलसी पत्र मृतक के मुख में डाले जाते हैं। नाक में रुई और तुलसी पत्र रखा जाता है। गर्मी के मौसम में शरीर को बर्फ या बॉक्स में सुरक्षित रखा जाता है। 2. सूचना देना और तिथि निर्धारण सभी रिश्तेदारों, परिचितों और संबंधियों को मृत्यु की सूचना दी जाती है। तेरहवीं की गणना मृत्यु के दिन से शुरू होती है, उसी दिन को पहला दिन माना जाता है। 3. अन्त्येष्टि (अर्थी) की तैयारी अगले दिन प्रातः पूजन सामग्री इकट्ठा कर शवयात्रा (अर्थी) की तैयारी की जाती है। आटे से पाँच पिंड बनाए जाते हैं, जिनमें 1-1 रुपये के सिक्के और काले तिल रखे जाते हैं। पिंडों को एक हाथ पर इस प्रकार रखा जाता है — एक मध्य में, दो एक ओर और दो दूसरी ओर। मृतक को स्नान कराया जाता है, नए वस्त्र पहनाए जाते हैं, तेल लगाकर कंघी की जाती है। 4. अंतिम संस्कार स्थल पर की जाने वाली क्रियाएं लकड़ी, उपले आदि का प्रबंध किया जाता है (यदि हरिद्व...